लग्नस्थ चंद्रमा – प्राचीन, आधुनिक, पाश्चात्य दृष्टिकोण, योग-फल व उपाय
ग्रंथ / दृष्टिकोण — श्लोक, अर्थ, शुभ व अशुभ प्रभाव
मानसागरी
"लग्नस्थे चन्दमे जातः समृद्धावान् सुखांश्चिरम्। नीतिमान् जनप्रियश्च विमुक्तो दुःखसंकटात्॥"
लग्न में चंद्रमा हो तो जातक धन-सम्पन्न, सुखी, नीति-प्रिय, लोकप्रिय तथा संकटों से मुक्त।
शुभ प्रभाव: धन, सुख, नीति-प्रियता, लोकप्रियता, संकट निवारण।
अशुभ प्रभाव: अशुभ दशा में आर्थिक हानि, लोकप्रियता में कमी।
जातकाभरण
"लग्ने चन्द्रो यदि स्थितः सौम्यः सौम्यफलप्रदः। धनधान्य समृद्धश्च प्रभावी प्रियवाक्यवान्॥"
चंद्र लग्न में हो तो सौम्यता, धन-धान्य, प्रभाव, प्रिय वाणी।
शुभ प्रभाव: धन-धान्य, प्रभावशाली व्यक्तित्व, मधुर वाणी।
अशुभ प्रभाव: चंद्र अशुभ होने पर अस्थिरता, मधुरता में कमी।
चमत्कार चितामणि
"लग्नस्थे शुभशुद्धे वा चन्द्रे जातः प्रजावान् भवेत्। सौख्ययुक्तोऽर्थवान् दीर्घायुषी च विराजते॥"
शुभ-शुद्ध चंद्र लग्न में हो तो संतानवान, सुखी, धनवान, दीर्घायु।
शुभ प्रभाव: संतान सुख, दीर्घायु, धन-सुख।
अशुभ प्रभाव: अशुभ दशा में संतान सुख में बाधा, स्वास्थ्य हानि।
बृहत् पाराशर होरा शास्त्र
"यदि लग्न स्थान में चंद्रमा हो, तो जातक सुंदर, साहसी, सहृदय, प्रवासी, कल्पनाशील होता है। शुभ दृष्टि से राजकीय सुख, पद-प्रतिष्ठा तथा समृद्धि प्राप्त होती है।"
सुंदरता, लोकप्रियता, भावुकता, कल्पना शक्ति, शुभ दृष्टि में उच्च पद व सम्मान।
शुभ प्रभाव: राजकीय सुख, पद-प्रतिष्ठा, रचनात्मकता।
अशुभ प्रभाव: अशुभ दशा में भावुकता, भ्रम, पद हानि।
फलदीपिका
"लग्नस्थे चन्द्रमे जातकः सुखसम्पन्नः सदा। दीर्घायुः कांति-युक्तश्च सर्वथा कलाप्रियः॥"
सुख-सम्पन्न, दीर्घायु, आकर्षक, कला-प्रेमी।
शुभ प्रभाव: सुंदरता, कला-रुचि, सांसारिक सुख।
अशुभ प्रभाव: अशुभ दशा में कला में असफलता, स्वास्थ्य हानि।
सारावली
"चन्द्रमा यदि लग्नस्थ: सौम्य: सौम्यफलप्रद: सदा। प्रसन्नचित्त:, ऐश्वर्यशाली, समाज में सम्मानित होता है।"
प्रसन्नचित्त, ऐश्वर्यशाली, सम्मानित।
शुभ प्रभाव: सामाजिक सम्मान, खुशमिजाजी।
अशुभ प्रभाव: अशुभ दशा में मानसिक अशांति, अपमान।
सर्वार्थ चिंतामणि
"लग्ने चन्द्रमा जातस्य बहु धनधान्य सम्पदा। स्वस्य माता प्रियं जातो दीर्घायु सुखमेव च॥"
धन-धान्य संपन्न, माता का प्रियता और दीर्घायु।
शुभ प्रभाव: मातृस्नेह, धन-समृद्धि, दीर्घायु।
अशुभ प्रभाव: मातृस्नेह में कमी, आर्थिक हानि।
भावार्थ रत्नकारा
"लग्नस्थे चन्द्रमे जातः सुखधनसमन्वितः। जनप्रियः कलासक्तः लक्ष्मीवान् सदा भवेत्॥"
सुख, धन, लोकप्रियता, कला-रुचि, लक्ष्मीप्राप्ति।
शुभ प्रभाव: लक्ष्मी योग, कला-प्रतिभा, जनप्रियता।
अशुभ प्रभाव: अशुभ दशा में कला/धन हानि।
आधुनिक दृष्टिकोण
मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक स्थिरता, सामाजिक प्रभाव।
शुभ स्थिति: निर्णय क्षमता, लचीलापन, सामाजिक समझ, रचनात्मकता।
अशुभ स्थिति: मानसिक रोग, अवसाद, भय, तनाव।
पाश्चात्य दृष्टिकोण (Western Astrology)
Moon in Ascendant: भावुक, अनुकूलनीय, पारिवारिक, केयरिंग, लोकप्रिय, आत्म-अभिव्यक्ति में प्रबल, माँ से गहरा जुड़ाव।
नकारात्मक: मूड स्विंग्स, स्वास्थ्य संवेदनशीलता, भावनात्मक असुरक्षा।
प्रमुख योग और उनके फल
गज केसरी योग — उच्च पद, धन, सामाजिक सम्मान
चन्द्राधि योग — बुद्धिमत्ता, दयालुता, यश
केमद्रुम योग — मानसिक तनाव, आर्थिक समस्या, अकेलापन
सुनफा/अनफा योग — धन-यश, आत्मनिर्भरता, मेहनत से सफलता
अमला/वसुमति योग — समाज में सम्मान, आर्थिक स्थिरता
सारांश
शुभ चंद्र लग्न में → सर्वांगीण समृद्धि, सौंदर्य, सांसारिक सुख, लोकप्रियता, मातृ स्नेह, मानसिक शांति।
अशुभ चंद्र लग्न में → अस्थिरता, मानसिक तनाव, रोग, आर्थिक समस्याएँ, सामाजिक दूरी।
उपाय (अशुभ चंद्र योग में)
- सोमवार को शिवलिंग पर जल चढ़ाएँ।
- महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
- मोती (Pearl) धारण करें (जन्मकुंडली देखकर)।
- माता का सम्मान करें और उनका आशीर्वाद लें।
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